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Saturday, July 11, 2009

मध्यप्रदेश बजट : फिर गांव-गरीब की ओर

भोपाल. वित्तमंत्री राघवजी शुक्रवार को सुबह साढ़े 10 बजे राज्य की भाजपा सरकार का छठवां बजट पेश कर दिया है। बजट में शामिल राज्य आयोजना का आकार 16114 करोड़ रखा गया है। आज प्रस्तुत बजट में कृषि, और ग्रामीण विकास पर बल दिया गया है। इसके साथ ही राज्य के विकास की गति को बनाए रखने के लिए योजना के आकार में पूर्व स्वीकृति की तुलना में 11।48 की बढोत्तरी की गई है। पुलिस विभाग के लिए बजट में पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी की बढोत्तरी की गई है। सरकार ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त थानों और आतंकवाद निरोध दस्ते के निर्माण पर बल दिया है।
क्या रहीं बजट की प्राथमिकताएँ
1.अधोसंरचना विकास
2. निवेश वृद्धि
3. कृषि को फायदे का व्यवसाय बनाना
4. शिक्षा और स्वास्थ्य
5. महिला सशक्तिकरण
6. सुशासन एवं संसाधन
7. कानून एवं
ग्रामीण विकास के लिए सरकार की योजना
  • रोजगार गारन्टी के लिए 5137 करोड
  • बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड : 546 करोड़
  • ग्रामीण आजीविका योजना : 95

कृषि के लिए क्या खास

  • पिछले साल की तुलना में इस साल 50 फीसदी का अधिक प्रावधान
  • कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन की स्थापना
  • गेंहू के उपार्जन पर बोनस हेतु इस वर्ष रु 90 करोड़ का प्रावधान
  • ग्वालियर में कृषि विवि की स्थापना
  • कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन की स्थापना
  • राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में रु 48 करोड़
  • दीर्घकालीन साख हेतु रू 275 करोड़ का

शिक्षा : क्या खास

  • 684 माध्यमिक शाला भवन एंव 18500 अतिरिक्त कक्षों का निर्माण
  • 28000 शिक्षकों की नियुक्तियां
  • महाविद्यालय में शिक्षा गुणवत्ता सुधार के तहत विदेश भ्रमण हेतु 50000 की पुरस्कार योजना
  • नेशनल इंस्टीटच्यूट ऑफ फैशन टेक्नालॉजी हेतु रु 30 करोड़ का प्रावधान
  • जाति अनुसूचित जनजाति के छात्रों को पीईटी पीएमटी प्रवेश परीक्षा हेतु देय छात्रवृत्ति रु 375 प्र. मा. से बढ़ाकर 500 प्र.माह और छात्राओं के लिए 525 प्र. मा
  • निशक्त छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना रु 500 प्र.

स्वास्थ्य : क्या खास

  • 161 उप स्वास्थ्स केन्द्र, 72 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं10 जिला चिकित्सालय के भवन निर्माण को पूर्ण करने हेतु प्रावधान

महिला एंव बाल कल्याण

  • 9691 आगंनबाड़ी तथा 9820 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रो की स्थपाना
  • 86 नई एकीकृत बाल विकास परियोजनाएंपोषण आहार हेतु: 781.84 करोड़ का प्रावधान
  • छात्राओं के लिए नि: शुल्क साईकिल कन्यादान योजना :25 करोड़

आयोजन में कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान

  • ग्रामीण विकास : रुपए 3483 करोड़ का
  • शिक्षा : रुपये 1497 करोड़ का
  • शहरी विकास : रुपए 854
  • स्वास्थ्य : रुपये 413 करोड़

सिचाई , सड़क, उर्जा

  • सड़क, भवन एवं सेतु के लिए 1843 करोड़ रुपये का प्रावधान
  • सिचाई के लिए रुपये 2485 करोड़ का प्रावधान
  • ऊर्जा क्षेत्र के लिए 1386 करोड़ का प्रावधान
  • कृषि क्षेत्र के लिए 1587 करोड़ का

साभार: दै.भा.

Wednesday, April 8, 2009

हर गरीब की अपनी हो पहचान : प्रभाष जोशी


इलाहाबाद। रोजी, रोटी और मकान अपनी हो पुख्ता पहचान। यही वह नारा था जो शहरी गरीबों के घोषणा पत्र पर अंकित था। शनिवार को शहरी गरीबों के इस नारे से सभागृह गूंज उठा। मौका था लोक सभा चुनाव पर शहरी गरीब संघर्ष मोर्चा द्वारा तैयार घोषणा पत्र का। घोषणा पत्र को प्रख्यात पत्रकार व चिंतक प्रभाष जोशी और मोर्चा की कार्यकर्ता तारा देवी ने जारी किया। कार्यक्रम का आयोजन शहरी गरीब संघर्ष मोर्चा, विज्ञान फाउण्डेशन, मुहिम एवं ह्यूमन राइटर्स ला नेटवर्क ने संयुक्त रूप से किया।
घोषणापत्र जारी करते हुए प्रभाष जोशी ने कहा कि हर गरीब की अपनी पुख्ता पहचान होनी चाहिए। इन मेहनतकश लोगों के बिना हमारे आधुनिक नगर की कल्पना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि गरीबों को जब तक उनकी पहचान और नागरिकता के अधिकार नहीं मिल जाते तब तक चुनाव और लोकतंत्र की बातें अधूरी हैं। श्री जोशी ने बाल भारती कैरियर कोचिंग के हाल में हुए दूसरे सत्र में न्यू लिबरल वाशिंगटन कान्ससनेस की बात उठायी। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश व अमेरिका के बीच संधि स्वरूप जो उदारीकरण की नीति विश्व में फैली उसके कई दुष्परिणाम देश को भुगतने पड़ रहे हैं। लेकिन इसका अहसास शासन व सत्ता पर बैठे लोगों को नहीं हो पा रहा है। आज की दुनिया में संघर्ष के नये सत्र विषयक संगोष्ठी में उन्होंने बताया कि उपनिवेशवाद अपने बदले स्वरूप में पैर पसार रहा है। पूंजी ही ब्रह्म और मुनाफा ही मोक्ष बन गया है। इसके प्रति सजग होने की जरूरत है। कार्यक्रम का आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ व इतिहास बोधमंच, पाकिस्तान इन्डिया पीपुल्स फोरम फार पीस एण्ड डेमोक्रेसी की ओर से किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता जियाउल हक ने की।
सुबह और शाम के सत्र में उपस्थित लोगों में डा.मानस मुकुल दास, रविकिरण जैन, प्रो. आरसी त्रिपाठी, प्रो. लाल बहादुर वर्मा, डा. पद्मा सिंह, उत्पला शुक्ला, डा. अनीता गोपेश, हरीश्चन्द्र, जीतेन्द्र मौर्य, यश मालवीय, जफर बख्त, असरार गांधी, फैज अंसारी आदि शामिल रहे। संचालन अंशु मालवीय ने किया।

साभार : दैनिक जागरण

Friday, March 27, 2009

गांव में ही हो उच्च शिक्षा की व्यवस्था


संगीता शुक्ला
गुजरात को विकासोन्मुख राज्यों की श्रेणी में अग्रणी माना जाता है और राज्य के विकास में एक महत्वपूर्ण कारक गुजरातियों की विकासोन्मुख सोच भी है। गावों में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की मांग गुजरातियों की इसी विकासात्मक सोच का परिचायक कही जा सकती है।
पंद्रहवीं लोकसभा के लिए चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो गई है। अब चंद दिनों बाद ही चुनाव प्रक्रिया भी शुरु हो जायेगी और नई लोकसभा का गठन होगा। नई लोकसभा का ताज किसके सर पर होगा यह कहना मुश्किल है लेकिन आजकल यह देखा जा रहा है कि सभी पार्टिया अपना पूरा जोर लगा रही है। शहरों में तो चुनावी माहौल चारों ओर दिख ही रहा है लेकिन गांवों में भी इन दिनों नेताओ की आवाजाही बढ गई है और गांव की जरुरतो पर खास ध्यान दिया जाता है। क्या उनके द्वारा दिये गये वचनो का पालन चुनाव जीतने के बाद होता है? या फिर नेताओं को जितनी फिक्र चुनाव से पहले गांव की होती है उतनी ही बाद में भी...गांवों के विकास की ओर सरकार क्या रुख अपनाती है इन्ही चंद सवालो का उत्तर जानने के लिए सोपान ने गुजरात के कच्छ, सौराष्ट्र और मध्य तथा उत्तर गुजरात के कुछ गांवो की मुलाकात ली और जाना कि गांवो के लोगों की क्या अपेक्षाएं है।
सबसे पहले सोपान ने कच्छ की मुलाकात ली और वहां के माहौल के बारे में हाजीभाई से बात की। हाजीभाई की उम्र 33 साल है और वे लोन्ड्री और बांधणी बनाने का धंधा करते हैं। जब हमने उनसे पूछा की आज देश में चारों ओर आर्थिक संकट छाया हुआ है तो इसकी असर क्या उनके धंधे पर भी हुई है? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि हां, जरुर हुई है क्योंकि बांधणी बनाने के लिए जो कपडा वे खरीदते है वह महंगा हो गया है और साथ ही बाजार में अन्य चीजों की किंमते भी बढी है जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पडता है। चुनावी माहौल के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि गुजरात की मौजुदा सरकार से वे खुश है क्योंकि इसके चलते उनके गांव का काफि विकास हुआ है और अब बिजली-पानी की किल्लत का सामना उन्हें बिल्कुल भी नहीं करना पडता है। जब हमने उनसे पूछा कि वे मतदान किस आधार पर करेंगें जाति या विकास ? तो उन्होंने बताया कि वे जातपात में नहीं मानते उन्हें केवल विकास चाहिये। नई सरकार से उनकी क्या अपेक्षाएं हैं इसके उत्तर मैं उन्होंने बताया कि यहां शिक्षा जरा कमजोर है इसलिए यदि नई सरकार शिक्षा की ओर अधिक ध्यान देगी तो उन्हें अच्छा लगेगा।
कच्छ-भुज विस्तार से ही हमने हीनाबेन पोनल से भी बातचीत की। हीनाबेन का वहां फोटोग्राफी और विडियोग्राफी का स्टुडियो है। हीनाबेन ने हमें बताया कि 26 जनवरी 2001 को कच्छ में भयंकर भूकंप आने से सारा शहर तबाह हो गया था लेकिन सरकार तथा अन्य सेवा संस्थाओं की मदद से आज कच्छ का नवनिर्माण हुआ है और अब कच्छ के हरेक व्यक्ति के पास अपना मकान और रोजगार है, जिससे कच्छवासी काफि खुश है। मतदान किस आधार पर करेंगे ऐसा पूछने पर उन्होंने बताया कि हम विकास को और जो उम्मीदवार उनके विस्तार से खडा रहेगा उसकी काबिलियत को ध्यान में रखकर ही मतदान करेंगे किसी जाति या पक्ष को ध्यान में रखकर नहीं।
कच्छ के बाद राजकोट के विडनगर गांव के रसिकभाई प्रागजीभाई रुपारेल मूंगफली और पपीते की खेती करते हैं। उन्होंने हमें बताया की गुजरात सरकार की "ज्योतिग्राम योजना" से उन्हें बहुत लाभ हुआ है। खेती के लिए बिजली-पानी भरपूर मिलता है। गांव का भी विकास हुआ है और पक्की सडके, मकान बनाये गये है। उन्होंने बताया कि चुनाव नजदीक आते ही गांव में सांसदो का आनाजाना बढ जाता है और इन दिनों वे खास हमारा हालचाल जानने आते हैं, फिर चाहे वे पांच साल तक अपनी शक्ल भी न दिखाये। खैर, इन दिनों दिये गये वचनों का वे कितना पालन करते हैं इसके जवाब में उन्होंने बताया कि 50% वचन पूरे किये जाते है। राष्ट्रीय पक्षो से उनकी क्या अपेक्षा हैं? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पक्ष यदि एकजुट होकर काम करेंगे तभी देश का विकास हो सकेगा। मौजुदा राज्य सरकार से वे खुश है क्योंकि वास्तव में गांव का विकास हुआ है। नई सरकार से उनकी अपेक्षाओं के बारे में वे बताते हैं कि उनके गांव में 12 कक्षा तक स्कूल तो है लेकिन कोलेज की व्यवस्था नहीं हैं जिससे बच्चो को उच्च शिक्षा के लिए राजकोट शहर तक जाना पडता है। यदि गांव में ही उच्च शिक्षा की सुविधा मिल जाय तो बच्चो को आसानी रहेगी।
राजकोट शहर के ही एक अन्य गांव लाखावाड में भी हम गये। वहां एक बेरोजगार युवक रणजीतभाई मेर से हमने बातचीत की। रणजीतभाई की उम्र 22 वर्ष है और वे 10वीं पास है। उच्च शिक्षा नहीं ली क्योंकि गांव में सुविधा न थी और वे शहर जाना नहीं चाहते थे। उनके पिताजी कपास व मूंगफली की खेती करते है। रणजीतभाई ने हमें बताया कि वे खेती काम में ही पिताजी की मदद करते हैं क्योंकि नोकरी उन्हें मिल नहीं सकती। मतदान किस आधार पर करेंगे? इसके उत्तर में उन्होंने बताया कि वे उम्मीदवार को ही देखते हैं फिर वो किसी भी पक्ष या जाति का क्यों न हो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पडता। बस, उम्मीदवार की नीयत उनके गांव का विकास करने की होनी चाहिये। पिछले पांच वर्षो में लाखावाड गांव में काफि विकास हुआ है।
आणंद जिल्ले के अदाण गांव के कल्पेशभाई मनुभाई पटेल की उम्र 36 वर्ष है और वे एग्रीकल्चर व फर्टीलाईझर मेन्युफेक्चरींग का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांव में कुछ लोग है जो जातिवाद को प्रोत्साहन देते हैं लेकिन वे उनमें नहीं हैं। राज्य सरकार ने उनके गांव का अच्छा विकास किया है। केन्द्र सरकार से उनकी अपेक्षा हैं कि किसी भी अंगुठा छाप व्यक्ति को कोई भी उच्च पद नहीं देना चाहिये। देश की कमान उन्हीं के हाथो सोंपनी चाहिये जो दूरदृष्टि रखता हों।
आणंद जिल्ले के ही पीपलाव गांव की एक गृहिणी प्रेमिलाबेन फूनाभाई पटेल की उम्र 56 वर्ष हैं और वे अच्छी तरह जानती हैं कि वोट किसे देना चाहिये क्योंकि वे अनुभवी हैं। उनके पति खेती का व्यवसाय करते हैं और उनकी एक बेटी अमेरिका में हैं जिससे वे मोबाइल से बात करती है। प्रेमिलाबेन ने बताया कि गांवों में मोबाइल आ जाने से उन्हें काफि सुविधा हो गई है। गांव के विकास से और मौजुदा राज्य सरकार से वे खुश है। उन्होंने बताया कि यदि सरकार इसी प्रकार उनके गांव का विकास करती रहेंगी तो उन्हें उनसे कोई शिकायत नहीं है।
गुजरात गांवों का वास्तव में विकास हुआ हैं और वहां की प्रजा भी विकास से खुश है। भविष्य में भी वे यही चाहते है कि सत्ता की बागडोर उसे ही सोंपी जाय तो पढा-लिखा हो, जिसमें दूरदृष्टि हो, देश सेवा ही जिसका धर्म हो। वह देश विकास को ध्यान में रखे न कि स्वविकास को। गुजरात के आज सभी गांव में मोबाइल क्रांति आ चुकी है जिससे लोगों की नजदिकीयां बढी है। जातिवाद या ज्ञातिवाद को वे बिल्कुल भी महत्व देना नहीं चाहते हैं। गांववासियो की महत्वकांक्षाएं तो हमने देखी अब देखना यह है कि उनकी इन अपेक्षाओं पर कौन-कौन खरा उतरता है और सत्ता की बागडोर किसके हाथों में जाती है।
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