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Friday, July 10, 2009

स्थानीय स्वशासन की प्रयोगशाला बनेगा सोनिया विहार

अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को नेताओं और अधिकारीयों का मुंह ताकने की जरुरत नहीं रहेगी । शीघ्र ही लोग ख़ुद अपने हित और क्षेत्र की समस्याओं पर स्वयं निर्णय लेने लगेंगे, क्योंकि दिल्ली में स्थानीय स्वशासन की संकल्पना अब जमीन पर उतर चुकी है, और इसकी प्रयोगशाला बनी है राजधानी में होकर भी उपेक्षा की शिकार एक अनधिकृत कालोनी सोनिया विहार....
उमाशंकर मिश्र/दिल्ली
अभी कुछ समय पहले मैग्सेसे अवार्ड विजेता अरविन्द केजरीवाल से मुलाकात हुयी। बातचीत के दौरान उन्होंने बुद्धकालीन एक घटना के बारे में बताया जिसमे २ राज्यों में उनकी सीमा से होकर बहने वाली नदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद था. पानी को लेकर आये दिन झगडा और तनाव रहता था. समस्या को लेकर जनता की मौजूदुगी में इस बारे में विचार विमर्श कर निदान खोजने की बात तय हुयी. सभा में स्वयं रजा सिद्दार्थ (बुद्ध) भी मौजूद थे. चर्चा शुरू हुयी तो लोगों ने सुझाव देना शरू किया कि नदी हमारे राज्य की सीमा से होकर बहती है, इसके पानी पर हमारा अधिकार है और हम अपने अधिकार को बलपूर्वक हासिल कर लेंगे. इस बात का बुद्ध ने विरोध करते हुए कहा कि हिंसा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि खून खराबे से कुछ हासिल नहीं होगा. लेकिन वहां मौजूद सभी लोगों ने पानी कि समस्या को ध्यान में रखते हुए बुद्ध के निर्णय को नकार दिया, जबकि वो राजा थे.वास्तव में इस कहानी के माध्यम से अरविन्द जी मुझे बताना चाहते थे कि जनता के फैसले के आगे राजा को भी झुकना पड़ गया. यही सच्चा लोकतंत्र है जहाँ जनता अपने हितों को लेकर फैसले लेने के लिए स्वतंत्र होती है. यही तो लोकशाही है? लेकिन एक लोक्तान्त्तिक देश होते हुए भी भारत में क्या लोगों इस तरह से निर्णय लेने कि स्वतंत्रता है? क्या जनता द्वारा चुने गए नेताओं द्वारा किये जाने वाले दुराचरण के बावजूद उन्हें पदच्युत करने कि ताकत जनता के पास है? बिलकुल नहीं, ऐसे तथाकथित जनप्रतिनिधियों को अगले ५ साल तक सहना मजबूरी बन जाती है. और यदि हम मजबूरी में जी रहे हैं और हमारी स्मस्याये जस कि तस बनी हुई हैं, उनका समाधान जनप्रतिनिधि नहीं कर रहे हैं तो कहे कि लोकशाही? शिव खेडा एक बात कहते हैं-जिस देश में हम अपनी पुलिस और अदालतों से डरते हों, क्या वहां लोकतंत्र हो सकता है? सवाल महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुलिस और न्यायपालिका जनता की समस्याओं, विवादों का निपटारा कर एक न्यायमूलक समाज कि स्थापना के सूत्रधार होते हैं. लेकिन इन दोनों संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते आम आदमी की न्यायिक व्यवस्था से भी आस्था डगमगाने लगी है.अरविन्द केजरीवाल लोकतंत्र की टूटती इन सांसों को बचने की कोशिश में जुट गए हैं. पर्याप्त शोध के बाद वे लोकशाही को पुष्ट करने के लिए स्थानीय स्वशासन की संकल्पना को अमली जामा पहनाने में जुटे हैं. सूचना के अधिकार के प्रचार प्रसार से ख्याति अर्जित करने वाले अरविन्द स्थानीय स्वशासन और उसके महत्व का पाठ पढाने की पहल कर रहे हैं. इसकी शुरुआत राजधानी की एक अनधिकृत कालोनी सोनिया विहार से होने जा रही है. इसकी एक बैठक हाल ही में संपन्न भी हो चुकी है.जिस तरह गांवों में ग्रामसभा गाँव के निवासियों की बॉडी होती है और गाँव के विकास से सम्बंधित किसी निर्णय पर ग्रामसभा के सदस्यों का सहमत होना जरूरी होता है, उसी तरह से शहरों में एक मुनिसिपल वार्ड के तहत आने वाली कालोनियों में मोहल्ला सभाओं की रचना की जायेगी. इन मोहल्ला सभाओं में सथानीय लोग शामिल होंगे, जो अपने इलाके की समस्याओं को चिन्हित कर उस कारवाही करने के लिए कार्य करेंगे. सभी मोहल्ला सभाओं का चेयरमैन उस वार्ड का निगम पार्षद होगा. पार्षद को मिलने वाला फंड कहाँ खर्च हो रहा है, इसकी जानकारी लोगो को रहेगी, और प्राथमिकता के मुताबिक जहाँ ज्यादा जरुरत होगी विकास कार्य किये जायेंगे.यदि किसी राज्य की समस्त मोहल्ला सभाएं मिलकर किसी एक विषय पर एकमत हो जाती हैं तो सरकार उसपर कानून बनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. इस तरह से कहा जाये तो जनप्रतिनिधि तो रहेंगे, लेकिन इस व्यवस्था के अस्तित्व में आ जाने से लोग अपने अधिकारों की मांग मोहल्ला कमेत्यों के माध्यम से करने लगेंगे तो नेताओं पर जनदबाव बढेगा और वे भी अभी जिम्मेदारी को निभाने के लिए बाध्य होंगे, क्योंकि उन्हें इस बात का आभास हो जायेगा की अब जनता एकजुट हो चुकी है और विकास कार्य न करने पर अगले चुनाव में लोग उन्हें सिरे से खारिज कर देंगे. ये डर नेताओं में आ जायेगा. शासकों और प्रशासकों को जनता का डर होता है तभी लोकशाही सही अर्थो में फलती फूलती है. लेकिन पिछले कुछ समय में तो इसका बिलकुल उलटा हुआ है, जनता अपने अधिकारों के प्रति सचेत नहीं रहती, जिसका फायदा उठाकर अपराधी भी संसद में पहुँच जाते हैं.बहरहाल सोनिया विहार की महिला निगम पार्षद अन्नपूर्ण मिश्र ने इस कार्य में पहल कर एक मिसाल कायम की है. हालाकिं उन्हें राजनितिक विरोधियों समेत पार्टी के स्तर पर भी विरोध का भय सता रहा है. लेकिन एक महिला होने के बावजूद उनका लीक से हटकर किया गया यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा. मैंने उन्हें जब पत्र लिखकर इस पर बधाई दी तो उनका फन मेरे पास आया, काफी देर तक बातचीत होती रही. कालोनी की समस्याओं से लेकर राजनितिक विरोध की बात भी हुयी. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया की अरविन्द केजरीवाल के इस क्षेत्र में काम करने की बात से इलाके के आधिकारी भी सहम से रहे हैं. यही नहीं क्योंकि अब इस अभियान के लगातार चलने से अन्नपूर्ण मिश्र भी निरंतर इलाके के लोगों के संपर्क में रहेंगी, ऐसे में उनके राजनितिक विरोधियों को भी चिंता सताने लगी है. क्योंकि जनता से सीधा संवाद होने से अन्नपूर्ण जी के प्रति लोगों का रुझान बढ़ना भी स्वाभाविक है, इसलिए उनके विरोधी घबराए हुए हैं.बहरहाल इस अभियान के अभी रंग में आने में काफी समय है, लेकिन इसके प्रभाव को लेकर अंदरखाते बहस शुरू हो चुकी है. सोनिया विहार देश का पहला ऐसा इलाका होगा जहाँ इस तरह की शरुआत होने जा रही है. अरविन्द केजरीवाल के लिए यह अभियान एक ड्रीम प्रोजेक्ट की तरह होगा, क्योंकि यहाँ से मिलने वाली सफलता को वो एक माडल के तौर पर प्रस्तुत करना चाहेंगे. बहरहाल जो भी हो इन कवायदों को देखते हुए इतना कहा जा सकता है की यदि सच में लोग एकजुट होकर पाने अधिकारों और समस्याओं पर फैसले लेने लगे तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना फिर दुस्वप्न न रह जायेगा. और ऐसा हुआ तो सेनिटेशन, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोड इत्यादि बुनियादी सुविधाओं की कमी कि मार झेल रहे सोनिया विहार के निवासियों को आने वाले समय में नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सकेगी.

Wednesday, April 8, 2009

हर गरीब की अपनी हो पहचान : प्रभाष जोशी


इलाहाबाद। रोजी, रोटी और मकान अपनी हो पुख्ता पहचान। यही वह नारा था जो शहरी गरीबों के घोषणा पत्र पर अंकित था। शनिवार को शहरी गरीबों के इस नारे से सभागृह गूंज उठा। मौका था लोक सभा चुनाव पर शहरी गरीब संघर्ष मोर्चा द्वारा तैयार घोषणा पत्र का। घोषणा पत्र को प्रख्यात पत्रकार व चिंतक प्रभाष जोशी और मोर्चा की कार्यकर्ता तारा देवी ने जारी किया। कार्यक्रम का आयोजन शहरी गरीब संघर्ष मोर्चा, विज्ञान फाउण्डेशन, मुहिम एवं ह्यूमन राइटर्स ला नेटवर्क ने संयुक्त रूप से किया।
घोषणापत्र जारी करते हुए प्रभाष जोशी ने कहा कि हर गरीब की अपनी पुख्ता पहचान होनी चाहिए। इन मेहनतकश लोगों के बिना हमारे आधुनिक नगर की कल्पना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि गरीबों को जब तक उनकी पहचान और नागरिकता के अधिकार नहीं मिल जाते तब तक चुनाव और लोकतंत्र की बातें अधूरी हैं। श्री जोशी ने बाल भारती कैरियर कोचिंग के हाल में हुए दूसरे सत्र में न्यू लिबरल वाशिंगटन कान्ससनेस की बात उठायी। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश व अमेरिका के बीच संधि स्वरूप जो उदारीकरण की नीति विश्व में फैली उसके कई दुष्परिणाम देश को भुगतने पड़ रहे हैं। लेकिन इसका अहसास शासन व सत्ता पर बैठे लोगों को नहीं हो पा रहा है। आज की दुनिया में संघर्ष के नये सत्र विषयक संगोष्ठी में उन्होंने बताया कि उपनिवेशवाद अपने बदले स्वरूप में पैर पसार रहा है। पूंजी ही ब्रह्म और मुनाफा ही मोक्ष बन गया है। इसके प्रति सजग होने की जरूरत है। कार्यक्रम का आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ व इतिहास बोधमंच, पाकिस्तान इन्डिया पीपुल्स फोरम फार पीस एण्ड डेमोक्रेसी की ओर से किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता जियाउल हक ने की।
सुबह और शाम के सत्र में उपस्थित लोगों में डा.मानस मुकुल दास, रविकिरण जैन, प्रो. आरसी त्रिपाठी, प्रो. लाल बहादुर वर्मा, डा. पद्मा सिंह, उत्पला शुक्ला, डा. अनीता गोपेश, हरीश्चन्द्र, जीतेन्द्र मौर्य, यश मालवीय, जफर बख्त, असरार गांधी, फैज अंसारी आदि शामिल रहे। संचालन अंशु मालवीय ने किया।

साभार : दैनिक जागरण

Monday, August 25, 2008

नदी भारत की, तर पाकिस्तान

केलंग [हिमाचल,अशोक राणा]।
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों की कड़वाहट बेशक आधी सदी गुजरने के बावजूद बरकरार है, लेकिन उन्मुक्त नदियां सरहदों और रिश्तों में खटास की परवाह कहां करती हैं। जीवंत उदाहरण है भारत के एक छोटे से कबायली क्षेत्र से निकलने वाली पौराणिक नदी चिनाब। पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से का खुशबूदार बासमती चावल चिनाब के दम पर ही दुनिया में महक रहा है।
कुछ दिनों पहले हमने उन पाकिस्तानी नदियों के बारे में समाचार छापा था, जिनके पानी से भारत के खेत सींचे जाते हैं। इस बार ब्योरा भारत की एक ऐसी ही नदी का। लेकिन इस मामले में एक पेंच यह है कि करीब एक हजार मील लंबी चिनाब नदी भारत में 380 मील बहने के बाद जम्मू-कश्मीर के अखनूर से होकर पाकिस्तान में प्रवेश करती है। यानी हम नदी की इतनी लंबाई का फायदा नहीं ले पा रहे हैं।
दूसरी ओर पाकिस्तान के मुजरावाला के समीप सन् 1920 में निर्मित अप्पर पारी तथा लोअर बारी चिनाब नहर लाहौर व लायलपुर के अलावा पंजाब की दो लाख हेक्टेयर भूमि सींच रही है। लायलपुर चावल की विख्यात किस्म बासमती चिनाब के पानी से ही फल-फूल रही है। पाकिस्तान की दो बड़ी विद्युत परियोजनाएं भी चिनाब पर हैं।
आजादी के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच हुई सिंधु जल संधि ने चिनाब के पानी से उसके उद्गम स्थल भारत को वंचित कर दिया। हिमाचल के कबायली क्षेत्र लाहुल व पांगी किलाड़ से चंद्राभाभा के नाम से बहने वाली चिनाब पाकिस्तान की कृषि के साथ बिजली परियोजनाओं के लिए भी संजीवनी बन चुकी है।
इधर भारत इस क्षेत्र में पानी की समस्या से जूझ रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रितवाड़ में निर्मित जिस सलाल बिजली परियोजना का उद्घाटन किया है, पाकिस्तान की आपत्ति के चलते इस परियोजना को बनने में करीब तीस वर्ष का समय लगा। हालांकि लाहुल-स्पीति में इस नदी पर लगभग एक दर्जन बिजली परियोजनाओं को बनाने की योजना अंतिम चरण में है।
अंतरराष्ट्रीय मामला होने के कारण केंद्रीय जल आयोग के लोग खुलकर बात करने से कतराते हैं, लेकिन नाम न छापने की शर्त पर आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि चिनाब नदी के पानी का औसतन मूल्य साठ हजार क्यूसेक फीट के आसपास रिकार्ड किया गया है।
लाहुल के वयोवृद्ध इतिहासकार छेरिंग दोरजे ने बताया कि लाहुल के बारालाचा दर्रे से निकलने वाली चिनाब नदी का जिक्र पुराणों में भी आया है। पुराणों में इसका नाम अस्किनी है। लाहुल-स्पीति के उपायुक्त सी पाल रासू का कहना है कि सिंधु जल संधि के मुताबिक झेलम, सतलुज और चिनाब नदियों के पानी पर पाकिस्तान का हक है। (याहू.कॉम)

Wednesday, January 23, 2008

विस्फोटों ने उड़ाई पाला के ग्रामीणों की नींद

Jan 23, 02:43 am
उत्तरकाशी। पाला-मनेरी जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए पेड़ों के कटान का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने समुचित पुर्नवास की मांग की है।
विकासखंड भटवाड़ी के अंतर्गत बन रही 480 मेगावाट की पाला-मनेरी जल विद्युत परियोजना निर्माण के दौरान हो रहे विस्फोटों से पाला गांव भूस्खलन की चपेट में है। भूस्खलन से गांव ही संकट में नहीं है बल्कि जंगल में बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान किए जाने की तैयारी है। रक्षासूत्र आंदोलन के सुरेश भाई व गांधी विचार मंच के अध्यक्ष डा। नागेन्द्र दत्त जगूडी की अध्यक्षा में जिलाधिकारी आर.मीनक्षी से मुलाकात की। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि पाला गांव का भू-वैज्ञानिकों से सर्वे करवाने के बाद गांव का पुनर्वास किया जाए। उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि पाला गांव परियोजना के सुरंग के मुहाने पर स्थित और सुरंग में टेस्टिंग के दौरान लगातार भूकंप जैसी स्थिति बनी हुई है। भूस्खलन से खेती नष्ट हो रही है। पाला महिला मंगल दल ने सुरक्षा की भी जिलाधिकारी से मांग की है। पाला महिला मंगल दल ने चेतावनी दी है कि यदि गांव का पुनर्वास नहीं किया जाता तो वे परियोजना का निर्माण कार्य रोक देंगी।
साभार : जागरण
उत्तर प्रदेश में किसान खेती के साथ करेंगे 'मास्टरगिरी'

लखनऊ, 22 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर पुरस्कृत किसान अब उत्तर प्रदेश में 'मास्टर साहेब' की भूमिका निभाएंगे। कृषि विभाग के 'सपोर्ट टू स्टेट एक्सटेंशन रिफार्म्स' के तहत शुरू होने जा रही योजना में प्रत्येक विकास खंड में ऐसे स्कूल खोले जा रहे हैं, जिसमें उपलब्धि हासिल करने वाले किसान खेती के वैज्ञानिक गुर सिखाएंगे।

इन स्कूलों में न तो क्लास रूम होगा और न ही ब्लैक बोर्ड। खेतों में ही क्लास लगेगी और विद्यार्थी व गुरु दोनों होंगे किसान। स्कूलों में पशुपालन, डेयरी और मछली पालन सहित रेशम उत्पादन के भी वैज्ञानिक तरीके बताए जाएंगे।

'फार्म स्कूल' नाम से संचालित इन विद्यालयों को वित्तीय मदद केंद्र सरकार देगी। इसके तहत प्रत्येक स्कूल को 50 हजार 414 रुपये दिए जाएंगे। इतना ही नहीं इन स्कूलों को किसानों के खेतों में खोला जाएगा।

स्कूलों में विभिन्न फसलों और उस क्षेत्र की कृषि की खूबियों के बारे में विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस दायरे में एकीकृत फसल प्रबंधन पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। किसानों की जो भी दिक्कतें होंगी उसका हल इन स्कूलों में तुरंत किया जाएगा। कृषि विभाग में अपर निदेशक मुकेश गौतम ने बताया कि यह पहल राष्ट्रीय किसान आयोग में प्रतिभावान किसानों के सुझाव व सिफारिश के आधार पर की गई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
बढ़ रहा है बर्ड फ्लू पर इंसान संक्रमित नहीं

कोलकाता, 22 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में नौ लोगों के बर्ड फ्लू से संक्रमित होने की अफवाहों के बाद कराई गई नमूनों की जांच के परिणाम नेगेटिव रहे हैं। इन परिणामों से राहत महसूस करते हुए अधिकारियों ने बचाव नीति के तहत आने वाले हफ्तों में बीस लाख से ज्यादा मुर्गियों को मारने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

'नेशनल इंस्टीटयूट आफ कम्यूनिकेबल डिजीजेज' (एनआईसीडी) के निदेशक शिव लाल के अनुसार, ''हमारे मुख्यालय में चार लोगों के रक्त के नमुनों की जांच की गई और सभी के परिणाम नेगेटिव रहे।'' गौरतलब है कि इससे पहले भी पांच नमूनों की जांच करवाई गई थी, जिनके परिणाम भी नेगेटिव रहे थे।

लाल ने कहा कि लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए और बेकार में परेशान नहीं होना चाहिए। इस बीच मालदा जिले के बर्ड फ्लू की चपेट में आने के बाद प्रभावित जिलों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। बुधवार से अब तक पश्चिम बंगाल में दो लाख से ज्यादा मुर्गे-मुर्गियों को मारा जा चुका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
उप्र में रोजगार गारंटी योजना की समीक्षा करेंगे रघुवंश प्रसाद सिंह

लखनऊ, 22 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोपों के मद्देनजर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह बुधवार को लखनऊ आ रहे हैं। यहां वह योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। बुधवार को तिलक हाल में सभी सत्तर जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है।

ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव रोहित नंदन ने बताया कि बैठक का एजेंडा क्या होगा? इस बारे में अभी वह कुछ नहीं बता सकते। उधर, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि हाल ही में राहुल गांधी ने बुंदेलखंड दौरे के दौरान केंद्रीय धन के जनता तक नहीं पहुंचने संबंधी टिप्पणी को गंभीरता से लेते हुए रघुवंश प्रसाद सिंह ने स्वयं योजना की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

Monday, January 14, 2008

मुख्यमन्त्री ने ली प्रसाशनिक कामकाज की खबर
दतिया कलेक्टर की छुट्टी

भोपाल । कलेक्टर दतिया के खिलाफ मुख्यमंत्री की कार्रवाई की सूचना प्रदेशभर में फैलते ही नौकरशाहों के खेमे में हडकंप मच गया। मुख्यमंत्री ने दोपहर में भोपाल से हेलीकाप्टर द्वारा सीधे ही राजगढ जिले के ग्राम दूबली की उडान भरी। साथ ही वे दतिया जिले में भी पहुंचे। उनके साथ जनसंफ सचिव मनोज श्रीवास्तव भी थे। भ्रमण की प्रमुख विशेषता यह रही कि मुख्यमंत्री चौहान स्वयं जन-समस्याओं के नोट्स अपनी डायरी में अंकित कर रहे थे। मुख्यमंत्री दतिया जिले की सेवढा तहसील के ग्राम गोहना में शिक्षकों के नियमित विद्यालय आने एवं मध्यान्ह भोजन व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। ग्रामीणों ने सिंचाई सुविधा बढाने का आग्रह किया। प्राथमिक कृषि साख समिति के निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने मिट्टी का तेल नियमित न मिलने की शिकायत की। ग्रामीणों ने एक उप स्वास्थ्य केंद्र शुरू करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान के अचानक दतिया जिले में पहचने की जानकारी मिलते ही ग्वालियर कमिश्नर डॉ. कोमल सिंह, दतिया कलेक्टर अशोक शिवहरे, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी उनसे मुलाकात करने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने संभागायुक्त को ग्रामीणों द्वारा प्राप्त आवेदनों पर (शेष पेज 9 पर)तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। आकस्मिक निरीक्षण में अनुपस्थित एवं कार्य के प्रति लापरवाह अधिकारी, कर्मचारियों विरुद्ध वैधानिक कदम उठाने की हिदायत दी। भ्रमण के दौरान बाइक का सहारा -मुख्यमंत्री ने ग्राम गोहना में भ्रमण के बाद वहां से धीरपुरा पहुंचने के लिए बाइक का सहारा लिया। खेतो-खलिहानों के बीच से मोटर साइकिल द्वारा उन्होंने अपनी निरीक्षण यात्रा शुरू की। माथे पर गमछा बांधने के बाद भी उन्हें पहचानने में अधिकांश ग्रामीणों ने कोई गलती नहीं की। मोटरसाइकिल सवार युवक के साथ मुख्यमंत्री श्री चौहान गांव धीरपुरा के थाने पहुंचे। पुलिस द्वारा दर्ज शिकायतों पर की गई कार्यवाही का हाल जानने के बाद उन्होंने सीधे जनता से कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर बातचीत की। शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, परिवहन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली आदि के कामकाज के बारे में वे ग्रामीणों से निरंतर बातचीत करते रहे। उन्होंने ग्रामवासियों से सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली के बारे में प्रश्न किए। पर्चिंयां लिखकर सौंपे आवेदन -ग्रामीणों ने छोटी-छोटी पर्चियों पर लिखकर अपने आवेदन मुख्यमंत्री को सौंपे। मुख्यमंत्री ने इन आवेदनों पर जल्द कार्यवाही के निर्देश दिए। शिकायत पर चंद मिनटों में कार्रवाई -ग्राम दूबली में रामगोपाल साहू ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी कि उन्हें बीपीएल कार्ड देने के लिए सरपंच 5॰॰ रुपए की मांग कर रहा था, लेकिन मैंने उसे नहीं दिए। फिर बीपीएल कार्ड हमें जनपद पंचायत से जून माह में मिला। मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई की और उनके निर्देश पर कलेक्टर ने रामगोपाल साहू से बात की तथा सरपंच द्वारा पैसे मांगने की जांच मौके पर तहसीलदार से कराई और सरपंच के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।

साभार ः राज एक्सप्रेस, 14 Jan, 2008 01:33 AM

जाति प्रमाण-पत्र बनाना टेढी खीर

भोपाल। स्थायी जाति प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया जटिल हो गई है। इसके लिए मांगे जा रहे दस्तावेजों की अनुपलब्धता के चलते अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों को कई परेशानियां उठाना पड रही हैं। शासन द्वारा अनु. जाति, जनजाति के स्थायी जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिए 195॰ का निवास संबंधी प्रमाण-पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। गौरतलब है कि 195॰ के दौर में इस जाति के अधिकतर लोग अनपढ और घुमक्कड प्रवृत्ति के हुआ करते थे। मजदूरी के लिए एक जगह से दूसरी जगह भटकते थे। इससे उस अवधि में इनका स्थायी ठिकाना नहीं होता था। वहीं 195॰ में मप्र मध्य भारत हुआ करता था और इसकी राजधानी नागपुर थी। साथ ही शासकीय नियमानुसार पूर्व में 12 वर्ष से अधिक के रिकार्ड को नष्ट कर दिया जाता था, जिसके चलते भी उस अवधि का रिकार्ड मिलना मुश्किल है। क्या हो रहा असर ः जाति प्रमाण -पत्र बनवाने में आ रही दिक्कतों के चलते अनु. जाति, जनजाति के लोगों को स्कूल, कालेजों में प्रवेश, छात्रवृत्ति, ऋण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरल हो प्रक्रिया ः मप्र कांग्रेस कमेटी स्वयंसेवी संगठन प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष कैलाश गुप्ता ने अजा-जजा के प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया सरल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 5॰ साल पूर्व के दस्तावेज मांगने की की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए।दस्तावेजों में से सन् 195॰ का स्थायी निवास प्रमाण संबंधी दस्तावेज बनाने की अनिवार्यता समाप्त की जाए।

साभार ः राज एक्सप्रेस, 14 Jan, 2008 01:33 AM
अभी दूर है नर्मदा जल भोपाल से

भोपाल। सरकार भले ही चुनाव के पहले नर्मदा जल भोपाल लाना चाहती है, लेकिन इसमें अभी दो से तीन साल लग सकते हें। खास बात यह है कि अब तक शहर में जल वितरण का प्लान नहीं बन पाया है। लगभग 300 करोड रुपए की लागत से नर्मदा जल भोपाल लाने की योजना है। इसके लिए टेंडर आदि की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और कार्यादेश भी दे दिए गए हैं। यह कार्य पीएचई द्वारा किया जा रहा है। वैसे तो यह काम 2॰॰8 में पूरा होना था, लेकिन टेंडर आदि की प्रक्रिया में इतना विलंब हुआ कि अब यह 2॰॰9 तक पूरी होने की उम्मीद है। पीएचई का काम केवल नर्मदा जल को जेल पहाडी तक छोडने का है। इसके बाद शहर में जल वितरण कराने की जवाबदारी नगर निगम को सौंपी गई है। इस पर लगभग 25॰ करोड रुपए खर्च होना है। नगर निगम अब तक इस योजना का प्रारूप भी नहीं बना पाया है। यह योजना तीन चरणों में पूरी की जानी है। अभी तक केवल एक चरण की योजना बनी है। दो चरणों की योजना बनने में ही चार माह का समय लगेगा। इस तरह निगम द्वारा यह कार्य वर्ष 2010 तक पूरा किया जाएगा। सर्वे का काम जारी महापौर सुनील सूद ने बताया कि सर्वे का कार्य चल रहा है। नर्मदा जल भोपाल आने के साथ ही इसके वितरण की व्यवस्था पूरी हो जाएगी।
साभार ः राज एक्सप्रेस, 14 Jan, 2008 01:32 AM