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Tuesday, June 24, 2008


मैला ढोने वाली ने किया रैंप पर कैटवाक

Jun 22, 09:22 pm
नई दिल्ली/जागरण

कभी सिर पर मैला ढोने वाली राजस्थान के दूरदराज के गांवों की कुछ महिलाएं अब संयुक्त राष्ट्र में आयोजित होने वाले एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में फैशन शो माडलों के साथ रैंप पर जलवे बिखेरेंगी।
संयुक्त राष्ट्र में कार्यक्रम पेश करने से पहले 30 महिलाओं के इस समूह ने राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को राहुल देव, कैरोल गार्सिया, जेसी रंधावा, आर्यन वैद, तमारा मोस और सानिया शेख तथा अन्य माडलों के साथ रैंप पर चहलकदमी की। इस फैशन शो में विविध तरह की साडि़यों और कुर्तो का प्रदर्शन किया गया।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा दो जुलाई को आयोजित किए जाने वाले साफ सफाई वर्ष आयोजन के उपलक्ष्य में कार्यक्रमों की श्रृंखला के लिए न्यूयार्क जाने से पहले राजस्थान की इन महिलाओं का उत्साह चरम पर है।
राजस्थान के अलवर जिले की प्रतिभागी सुशीला ने कहा कि मेरे लिए यह एक सपने के सच होने जैसा है। हमने इसके बारे में कभी नहीं सोचा था, लेकिन प्रशिक्षण मिलने और समाज के सम्मानित लोगों से संवाद होने के बाद हमारे अंदर काफी विश्वास पैदा हो गया है।
गैर सरकारी संगठन सुलभ इंटरनेशनल ने इन महिलाओं को सिर पर मैला ढोने की प्रथा से मुक्त कराया था और वह अब इनके पुनर्वास की कोशिश में लगा है।
इस संगठन के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने कहा कि संगीत सभा, नाटक और हास्य जैसे कार्यक्रम आज के समय में लोगों के साथ संवाद करने का सबसे आसान माध्यम हैं। इस तरह के आयोजनों से दलितों की जीवनशैली में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
हाईटेक होते चंडीगढ़ के भिखारी

चंडीगढ़/जागरण : सिटी ब्यूटीफुल का नया चेहरा,यहां के भिखारी दिन में भीख मांग कर ही जितने रुपये बना लेते हैं उतने तो एक आम आदमी पूरे दिन कड़ी मेहनत मशक्कत करने के बाद भी नहीं बना पाता है।
सेक्टर 32 में स्थित निर्माण थियेटर के सामने बैठे हुए एक भिखारी से जब इस बारे में बातचीत की गई तो उसने बताया कि वह पिछले तीन सालों यही काम कर रहा है आगे बताते हुए उसने कहा कि इस काम में मेहनत कम और मुनाफा अधिक है इसी बीच उसका मोबाइल बज उठा उसने थोड़ी देर बात कर, बताया कि दिन में वह आराम से 250-300 रुपये कमा लेता है जबकि खाना दिन में तीनों टाइम ढाबे में करता है।
इसके अलावा सेक्टर 43,17,22 की मार्केट और पिकाडली थियेटर के पास मिले इस पेशे से जुडे़ व्यक्तियों के अनुसार ये लोग दिन में कम से कम 200-300 रुपये दिहाड़ी तो बना ही लेते हैं। इसके अलावा इनमें से कइयों के पास तो स्कूटर भी है। इनकी तुलना में अगर आम दिहाड़ीदार को देखा जाऐ तो वह दिन भर कड़ी मेहनत करके मुश्किल से 100-150 रुपये ही कमा पाता है।
चंडीगढ़ में भिखारियों की इतनी कमाई साथ लगते राज्यों में रहने वाले इसी पेशे से जुड़े हुए लोगों को चंडीगढ़ की तरफ आकर्षित कर रही है जिससे दिन-प्रतिदिन यहां भिखारियों की संख्या बढ़ रही है। अगर इस समस्या को खत्म करने के लिए प्रशासन ने शीघ्रता से कोई कदम नहीं उठाया तो धीरे-धीरे सिटी ब्यूटीफुल भिखारियों का अड्डा बन जाएगा।
जहां पूरे गांव में लगी हैं सीएफएल

कुरुक्षेत्र [विनोद चौधरी]। गांव एक, घर 217, बल्ब 815 और प्रतिदिन की बचत 1465 रुपये। कुरुक्षेत्र के एक छोटे से गांव यारी ने ऐसी राह पकड़ी है, अगर सभी इसी रास्ते पर चलें तो प्रदेश के लोगों को आने वाले दिनों में बिजली किल्लत से जूझना नहीं पड़ेगा। यारी गांव के लोगों ने 1465 रुपये प्रतिदिन, 43 हजार 967 रुपये प्रतिमाह और पांच लाख 34 हजार 936 रुपये प्रतिवर्ष के हिसाब से बचत करने वाले नुसखे को अपनाया है।
अक्षय ऊर्जा विभाग की मुख्य परियोजना अधिकारी एवं अतिरिक्त उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने बताया कि यारी एक ऐसा गांव है, जिसमें सभी घरों में बिजली की कम खपत करने वाले सीएफएल [कंपेक्ट फ्लोरोसैंट लैंप] का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया की यारी गांव के लोगों ने बिजली बचाओ, बिजली बढ़ाओ के महत्व को समझा है और अक्षय ऊर्जा विभाग के सहयोग से पूरे गांव को सीएफएल युक्त कर दिया गया है।
अक्षय ऊर्जा विभाग के परियोजना अधिकारी बलवान सिंह गोलन ने बताया कि पहले इस गांव में सौ वाट के 768, 60 वाट के 32, 40 वाट के 13 व अन्य टयूब लाइटें लगी हुई थी। उनके स्थान पर अब गांव में 800 सीएफएल लगाए गए हैं। पहले जहां गांव में लगे बल्ब छह घंटे में 475।74 यूनिट बिजली की खपत करते थे, वहीं उनके स्थान पर लगाई गई सीएफएल टयूब इतने समय में केवल 72 यूनिट बिजली ही खर्च करती हैं। गांव की कुल आबादी 1160 है, इस हिसाब से गांव का हर आदमी प्रतिदिन एक रुपये से भी ज्यादा की बचत में हिस्सेदारी कर रहा है। अगर सभी गांव बिजली की आवश्यकता को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा सीएफएल का उपयोग करें तो बिजली की खपत को काफी कम किया जा सकता है।
Jun 23, 08:53 : याहू

Friday, June 20, 2008

अभी ज्यादा समय नहीं हुआ विस्फोट.कॉम की शुरुआत हुए, लेकिन इसकी गूंज अब सुनाई देने लगी है....एक नई तरह की धारा पत्रकारिता जगत में लेकर चलने के लिए बहुत साधुवाद संजय तिवारी जी को......

Thursday, June 5, 2008

Vat Savitri Pooja Love and Longavity for husband
Married women of Chhattisgarh are also performing Vata Savitri Puja. Vata Savitri Puja is observed on Amavasya. The Amavasya falls on hindu month Jyestha. This year today 03 June 2008 is Vata Savitri Puja. Vat is Banyan Tree, Savitri is a mythological character who brought her husband from mouth of death and Puja (Pooja) is worship. The most beautiful fact about the worship is the banyan tree is tied with sacred thread. Very environment and eco friendly festival giving the highest honor to a tree. Ladies keep fast devoted to Savitri. The celebration is very popular in Chhattisgarh, Madya Pradesh, Bihar, Uttar Pradesh, Delhi, Orissa and Maharashtra