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Monday, January 14, 2008

जमीन पाने भटक रही विधवा

उमरेठ । उमरेठ निवासी विधवा महिला प्रेमलता बाई की पांच एकड भूमि में से 76 डिसमिल जमीन अन्य किसान के रकबे में जोड दी गई। जमीन पर स्वामित्व पाने विधवा महिला तथा उनके पुत्र शरद चौरसिया द्वारा जगह-जगह गुहार लगा दी गई। इसके अलावा राजस्व मंत्री कमल पटेल, कलेक्टर अरुण पांडे को लोक कल्याण शिविर में समस्या से भी अवगत करा दिया गया। राजस्व मंत्री के सख्त निदेशों के बावजूद पीडित विधवा महिला को उसकी जमीन पर हक नहीं मिल पा रहा है। उपतहसील उमरेठ में गत माह आयोजित होने के पश्चात 11 जनवरी को पुनः ग्राम पंचायत गाजनडोह में जिला स्तरीय लोक कल्याण शिविर आयोजित होने जा रहा ह। लोक कल्याण के नाम पर आयोजित होने वाले इस शिविर की अध्यक्षता अरुण पांडे करेंगें। विगत माह राजस्व मंत्री कमल पटेल के मुख्य आतिथ्य एवं जिला कलेक्टर अरुण पांडे की अध्यक्षता में संपन्न उमरेठ लोक कल्याण शिविर में राजस्व मंत्री को प्रेमलता बाई के पुत्र शरद चौरसिया द्वारा यहां के राजस्व निरीक्षक के विरुद्घ बिंदुवार शिकायत की गई थी। जिसमें कहा गया था कि राजस्व दस्तावेजों में दर्ज कुल 5 एकड के रकबे में से 76 डिसमिल भूमि का हिस्सा काटकर एक अन्य किसान के रकबे के खसरे में जोडा गया। बताया जाता है कि उक्त भूमि पूर्व में पदस्थ पटवारी हल्का नम्बर 5 द्वारा त्रुटिवश जोडा गया था। शेष 4.24 डिसमिल भूमि में दूसरे खसरे रकबे से 76 डिसमिल जमीन जोडा जाकर 5 एकड पूर्ण किया जाना था। जिसे सीमांकन अधिकारी ने नक्शा दुरुसती के दौरान 36 डिसमिल दस्तावेजों में बताकर सीमा चिन्ह 76 डिसमिल पर लगाए। उसी अधिकारी द्वारा पुनः सीमांकन के उपरांत 45 डिसमिल भूमि दूसरे किसान के खसरे रकबे में बताकर 36 डिसमिल पर सीमा चिन्ह लगाए। इतना ही नहीं उक्त पीडित महिला को सीमांकन रिर्पोट दो माह तक नायब तहसील कार्यालय नहीं भेजी गई है। उस फील्ड रिर्पोट भूमि में स्थित दो नलकूपों का उल्लेख नहीं किया गया तथा अतिरिक्त निकली भूमि जो सीमांकन के दौरान पडत थी। जिसे कास्त में दर्शाया गया। उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व मंत्री कमल पटेल ने जिले के राजस्व मुखिया को ओर मुखातिब होकर मंच से ही तीन दिनों के अंदर मामले की सूक्ष्म व निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारी को तत्काल निलंबित कर बर्खास्तगी की कार्रवाई करने के लिए कहा। सवा माह बीत जाने के बाद उक्त आवेदन न्याय के इंतजार में फाइलों में कैद हो गया लगता है। उमरेठ के बाद गाजनडोह में शिविर पुनः आयोजित होने जा रहा है। किंतु उक्त शिकायत के अंजाम तक न पहुंचने से यह शिविर के आयोजन के उद्देश्यों के परिणामों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। इससे एक ओर जहां आरोपी अधिकारी विभाग में अपनी गहरी पैठ होने का दंभ भर रहा है वहीं इस घटना को प्रशासन की ढीली पकड के रुप में देखा जा रहा है। इस मामले में राजस्व मंत्री के आदेशों की अवहेलना उनके ही मातहत अमला द्वारा जाने से आम जनों तक पहुंच कहा है। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। पीडित विधवा महिला प्रेमलता का कथन है कि इस मामले की जांच करने परासिया एसडीएम आए थे मौका मुआयना करने के बाद नायब तहसीलदार परासिया को दो दिनों में सीमांकन कर पूरी 5 एकड जमीन पर कब्जा दिलाने के निर्देश दिए गए थे। जब नायब तहसीलदार, आरआई, पटवारी को लेकर यहां जमीन नापने पहुंचे। इसके पूर्व रात्रि में ही पेठल पवार ने सन की फसल काटकर गेहूं की बोनी कर पानी सिंचाई कर भिगों दी। उसके बाद कोई नहीं आया। पीडित विधवा महिला न्याय पाने अभी भी कार्यालयों के चक्कर काट रही है।

साभार ः राज एक्सप्रेस, 13 Jan, 2008 09:01 PM

1 comment:

आशीष महर्षि said...

ऐसे मुददों को उठाने के लिए वाकई आप साधुवाद के पात्र हैं