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Monday, January 14, 2008

महिला हेल्पलाइन ने जोडे 213 परिवार

छिंदवाडा । पारिवारिक विवादों, आपसी नासमझी और घरेलू हिंसा के चलते टूट रहे परिवारों को जोडने में महिला हल्प लाइन ऐसे परिवारों के लिए सेतु का काम कर रही है। एक साल में महिला हेल्प लाइन अब तक 207 परिवारों को जोड चुकी ह। यह वे परिवार हैं जिनमें पति-पत्नी अलग अलग रह रहे थे और जिनके मामले पुलिस थाना से लेकर परिवार परामर्श केन्द्र तक जा चुके थे। हेल्प लाइन में आवेदन आने के बाद काउंसलरों ने दोनों पक्षों को बुलाकर न केवल समझाइश दी बल्कि उनके हालातों का भी अध्ययन किया और फिर समझौता करा दिया। काउंसलरों की बातों से अलग-अलग रह रहे पति-पत्नी फिर से साथ रहने को राजी हो गए। रविवार को भी ऐसे ही एक मामले में हल्प लाइन में एक पति की पोल उस समय खुल गई जब पत्नी ने हेल्प लाइन में आकर सच्चाई बताई। हल्प लाइन की काउंसलर श्रीमती संजीता शर्मा ने बताया कि शहर के एक युवक ने हेल्प लाइन को यह आवेदन दिया था कि उसकी पत्नी बार-बार मायके चली जाती है और उसके साथ नहीं रहना चाहती। हल्प लाइन में जुन्नारदेव के माजरी में रहने वाली उसकी पत्नी को बुलाया तो मामला कुछ और ही निकला। उसकी पत्नी ने बताया कि वह टीबी की बीमारी से ग्रस्त थी इस कारण उसका पति उसे साथ नहीं रखना चाहता वह तो अपने पति के साथ रहना चाहती है। हल्प लाइन ने दोनों को आमने-सामने कर बात कराई और टीबी की बीमारी को सामान्य बताया और दवाओं से बीमारी ठीक होने की बात कही। समझाइश में दोनों पति पत्नी फिर से साथ रहने को राजी हो गए जो एक साल से अलग अलग थे। श्रीमती शर्मा ने बताया कि हेल्प लाइन में एक साल में अब तक 250 मामले आ चुके हैं जिनमें 15 प्रकरण ही ऐसे हैं जिन्हें न्यायालय को भेजा गया है, वहीं 16 प्रकरण अभी लंबित ह। इसके अलावा छह अन्य प्रकरणों में भी कार्रवाई चल रही है।
साभार ः राज एक्सप्रेस, 13 Jan, 2008

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