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Sunday, November 4, 2007

मुद्रास्फीति की दर और आम आदमी





''आलू प्याज ने सेंसेक्स को पछाडा है''
- आलोक पुराणिक
"गाड़ लाइज इन डिटेल्स"; दरअसल महंगाई कम बताने वाले एक आंकडे की डिटेल्स में शैतान की तरह डराने वाले आंकडे भी बसते हैं। थोक मूल्य सूचकांक का सरकारी आंकडा खासा महत्वपूर्ण माना जाता है। रिजर्व बैंक इससे लेकर चिंतित रहता है। वित्त मंत्रालय भी इसे लेकर चिंतित रहता है। पर ३.७ फीसदी का आंकडा ऐसा नहीं है, जिसे लेकर चिंतित हुआ जाये। पर "डेविल लाइज इन डिटेल्स", इस आंकडे के पीछे के आंकडों को देंखे तो दह्सत होती है। उपभोक्ता की जेब में छेड़ करती महंगाई बताती है कि इतनी कम महंगाई की दर के पीछे कुछ भेद हैं। और वह भेद यह है कि काहने पीने की चीजों ने जो उन्चाइयां छुई हैं, वो सेंसेक्स की छलांग को पीछे छोड़ गयी है।
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2 comments:

Shiv Kumar Mishra said...
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Shiv Kumar Mishra said...

मुझे तो लगता है कि पिछले कई महीनों से मुद्रा स्फीति की दर का जो भी आंकडा बिजनेस न्यूज़ चैनल पर दिखाई देता है, उसे हमारे तारनहार 'डार्ट बोर्ड मेथड' से निकालते हैं....

होलसेल प्राईस इंडेक्स के मायने कुछ नहीं रह गए...कम से कम आम जनता के लिए तो कुछ नहीं....कई बार शक होता है कि तथाकथित 'मार्केट एक्सपेक्टेशन' को ध्यान में रखकर 'डार्ट बोर्ड मेथड' का उपयोग होता है.